
राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे ग्राम पंचायत हरिपुर कलां में एक हिरण को दो आवारा कुत्तों ने मौत के घाट उतार दिया। ग्रामीणों ने पार्क प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों को फोन पर जानकारी दी लेकिन सूचना के करीब डेढ़ घंटे बाद वनकर्मियों की टीम मौके पर पहुंची।
वन्य जीव संरक्षण व संवर्धन को लेकर पार्क प्रशासन द्वारा किए गए दावे खोखले साबित होते दिखायी दे रहे है। वन जीवों की सुरक्षा को लेकर वन महकमा कितना सजग है इसकी बानगी राजाजी टाइगर रिजर्व से सटे हरिपुर कलां क्षेत्र में देखने को मिली। घटना सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे की है। जब जंगल से निकलकर एक हिरण आबादी क्षेत्र में जा घुसा। हिरण को देखते हुए उसे आवारा कुत्तों ने घेर लिया। काफी देर तक कुत्तों ने हिरण को दौड़ाए रखा और आखिरकार कुत्तों के हमले में हिरण की मौत हो गई । इस दौरान ग्रामीणों ने हिरण को बचाने के भरसक प्रयास किए, वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को फोन भी किया लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को राजाजी की हरिद्वार और मोतीचूर रेंज का बताते हुए अपना पल्ला झाड़ लिया। दो रेंजों की सीमा विवाद के चलते कुत्तों के बीच फंसे हिरण को बचाया नही जा सका। ग्रामीणो का कहना है कि यदि वन कर्मी समय पर पहुंच जाते तो हिरण की जान बच सकती थी। वन्यजीव प्रेमी व पूर्व ईको विकास समिति के अध्यक्ष धमेंद्र ग्वाड़ी, अरूण जोशी ने बताया कि उनके द्वारा घटना की जानकारी मोतीचूर और हरिद्वार रेंज अधिकारी को दी गयी, लेकिन किसी ने भी सक्रियता नही दिखायी। करीब डेढ़ घंटे बाद मोतीचूर रेंज के वन कर्मियों की टीम मौके पर पहुंची और मृत हिरण के शव को कब्जे मे लिया।
मामले की जिम्मेदारी हरिद्वार रेंज की थी। लेकिन जब बात वन्यजीव संरक्षण और संवर्धन की हो तो कर्मचारियों को तुरंत एक्शन लेना चाहिए। आबादी क्षेत्र में इस तरह की घटना हो जाती है।

