समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के उत्तराखंड के लोगों को लेकर दिए गए बयान से उत्तराखंड की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देवभूमि के स्वाभिमान और राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष का अपमान बताया। वहीं, कांग्रेस की ओर से भी इस टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई है। कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह भंडारी ने संविधान, नागरिकों की स्वतंत्रता और उत्तराखंड की बेटी डिंपल यादव का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव को बयान देते समय सावधानी बरतने की नसीहत दी।
अखिलेश यादव ने क्या कहा था?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा घुसपैठिए उत्तराखंड के लोग हैं। उन्होंने घुसपैठिया शब्द की परिभाषा तय करने की बात भी कही। उनके इस बयान के सामने आने के बाद उत्तराखंड के राजनीतिक गलियारों में प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। हालांकि, बयान के पूरे संदर्भ को समझने के लिए मूल वीडियो और उसकी संपूर्ण बातचीत देखना भी जरूरी है।
CM पुष्कर सिंह धामी ने जताई कड़ी आपत्ति
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि उत्तराखंड देवभूमि भी है और वीरभूमि भी। इस धरती ने देश को संत, सैनिक और राष्ट्रसेवा के लिए समर्पित अनेक व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना प्रदेश के स्वाभिमान और उसके संघर्ष का अपमान है।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने बयान में वर्ष 1994 के रामपुर तिराहा कांड का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जब अखिलेश यादव के पिता मुलायम सिंह यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब अलग उत्तराखंड राज्य की मांग कर रहे आंदोलनकारियों पर मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में गोलीबारी हुई थी। धामी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग अपने संघर्ष और बलिदान को नहीं भूले हैं।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस से भी सवाल किया कि क्या वह अपने राजनीतिक सहयोगी अखिलेश यादव के इस बयान का समर्थन करती है और क्या उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहना उसे स्वीकार है।
कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह भंडारी ने क्या कहा?
कांग्रेस के संगठन महासचिव राजेंद्र सिंह भंडारी ने भी इस बयान पर आपत्ति जताते हुए संविधान और देश के नागरिकों को प्राप्त स्वतंत्रता का हवाला दिया। उनके अनुसार, भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को देश में कहीं भी रहने और आने-जाने की स्वतंत्रता देता है। कोई भी नागरिक अपनी योग्यता, मेहनत और क्षमता के दम पर देश के किसी भी हिस्से में जाकर काम कर सकता है और अपना जीवन बना सकता है।
भंडारी ने अखिलेश यादव के परिवार का उल्लेख करते हुए डिंपल यादव को उत्तराखंड की बेटी बताया। उन्होंने कहा कि जब उत्तराखंड की बेटी डिंपल यादव उनके परिवार का हिस्सा हैं, तो उत्तराखंड के लोगों के बारे में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने अखिलेश यादव को बड़ा नेता बताते हुए कहा कि उन्हें कोई भी बयान देने से पहले उसके शब्दों और प्रभाव पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
कांग्रेस नेता के इस रुख को प्रदेश के सम्मान और देश के नागरिकों की स्वतंत्रता से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, राजेंद्र सिंह भंडारी के इस बयान का स्वतंत्र समाचार स्रोत से पूरा पाठ उपलब्ध नहीं होने के कारण इसे उनके बताए गए कथन के आधार पर प्रस्तुत किया गया है।
भाजपा ने भी उठाए सवाल
मुख्यमंत्री धामी की प्रतिक्रिया के बाद भाजपा की ओर से भी इस मुद्दे को उत्तराखंड की अस्मिता और राज्य आंदोलन के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। धामी ने अपने सार्वजनिक बयान में अखिलेश यादव की टिप्पणी पर आपत्ति जताने के साथ कांग्रेस से भी अपना रुख स्पष्ट करने को कहा।
भाजपा की आपत्ति का मुख्य आधार यह है कि उत्तराखंड के लोगों को घुसपैठिया कहने वाली टिप्पणी प्रदेश की पहचान और राज्य निर्माण के लिए हुए संघर्ष को ठेस पहुंचाती है। दूसरी ओर, इस विवाद के केंद्र में अखिलेश यादव की टिप्पणी का संदर्भ और घुसपैठिया शब्द के इस्तेमाल को लेकर उठे सवाल हैं।
संविधान और नागरिकों की स्वतंत्रता का मुद्दा भी चर्चा में
इस राजनीतिक विवाद के बीच नागरिकों के देश के भीतर आवागमन और निवास की स्वतंत्रता का मुद्दा भी चर्चा में है। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को देश के भीतर स्वतंत्र रूप से घूमने तथा भारत के किसी भी हिस्से में निवास करने और बसने का अधिकार देता है। इन अधिकारों पर संविधान में निर्धारित उचित प्रतिबंध भी लागू होते हैं।
इसलिए किसी राज्य से दूसरे राज्य में जाकर रोजगार करना, रहना या व्यवसाय करना अपने आप में घुसपैठ नहीं है। घुसपैठ शब्द का इस्तेमाल किस संदर्भ में किया जा रहा है, यह स्पष्ट करना जरूरी है।
उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी
अखिलेश यादव के बयान के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और कांग्रेस नेता राजेंद्र सिंह भंडारी की प्रतिक्रियाओं ने इस मुद्दे को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। मुख्यमंत्री ने राज्य आंदोलन के इतिहास और प्रदेश के सम्मान का सवाल उठाया, जबकि कांग्रेस नेता ने संविधान और नागरिकों की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए बयान पर आपत्ति जताई।
