
उत्तराखंड की मासूम बेटी नन्ही परी के साथ 2014 में हल्द्वानी,काठगोदाम के शीशमहल में हुए सामूहिक बलात्कार और हत्या की वीभत्स घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। लोअर कोर्ट और हाई कोर्ट ने मुख्य आरोपी अख्तर अली को फांसी की सजा सुनाकर न्याय की उम्मीद जगाई थी। लेकिन 11 वर्षों बाद, सर्वोच्च न्यायालय द्वारा आरोपी को बरी कर देना न केवल पीड़िता के परिवार की पीड़ा को बढ़ाता है, बल्कि न्याय व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
इस अन्याय के खिलाफ और नन्ही परी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर
उत्तराखंड प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कमेटी, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस, और NSUI द्वारा कांग्रेस भवन से घंटाघर तक एक कैंडल मार्च आयोजित किया गया।
<span;><span;>- नन्ही परी की आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करना
<span;><span;>- सर्वोच्च न्यायालय से पुनर्विचार की अपील करना
<span;><span;>- दोषियों को सख्त सजा दिलाने की मांग करना
<span;><span;>- न्याय व्यवस्था में जनविश्वास की पुनर्स्थापना करना
मुख्य मांगें:
<span;><span;>- सुप्रीम कोर्ट इस फैसले पर पुनर्विचार करे और पीड़िता को न्याय दिलाए
<span;><span;>- बलात्कार जैसे जघन्य अपराधों में कोई ढील न दी जाए
<span;><span;>- बेटियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए
<span;><span;>- प्रदेश सरकार इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़िता के परिवार की अपील को सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचाने में सहयोग क
शज्योति रौतेला अध्यक्ष, प्रदेश महिला कांग्रेस ने कहा
“नन्ही परी की आत्मा आज हमसे न्याय की पुकार कर रही है। यह सिर्फ एक बच्ची का मामला नहीं, पूरे समाज की अस्मिता का सवाल है। हम सुप्रीम कोर्ट से पुनर्विचार की अपील करते हैं और सरकार से मांग करते हैं कि वह इस मामले में हस्तक्षेप कर न्याय सुनिश्चित करे।”
सूर्यकांत धस्माना प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा यह फैसला न्याय की आत्मा को आहत करता है। कांग्रेस पार्टी हर बेटी की सुरक्षा और सम्मान के लिए संघर्ष करती रहेगी। हम इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाते रहेंगे।

