
उत्तरकाशी जिले के धराली कस्बे के लिए 5 अगस्त 2025 का दिन कभी न भूलने वाला था। इसी दिन खीरगंगा नदी में अचानक आए सैलाब ने गंगोत्री हाईवे किनारे बसे इस खूबसूरत कस्बे को तबाही के मंजर में बदल दिया था। देखते ही देखते तेज बहाव अपने साथ भारी मात्रा में मलबा लेकर आया और धराली के कई हिस्से इसकी चपेट में आ गए।
इस विनाशकारी आपदा की तस्वीरों और वीडियो ने पूरे देश और दुनिया का ध्यान खींचा था। बाढ़ और मलबे की चपेट में आने से चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि 52 लोग लापता हो गए थे। इनमें से अब तक 20 लोगों को मृत घोषित किया जा चुका है। कई परिवारों ने अपनों को खो दिया और कई लोगों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया।
कभी गंगोत्री धाम की यात्रा का प्रमुख पड़ाव रहा धराली आज भी उस आपदा के निशान अपने अंदर समेटे हुए है। गंगोत्री हाईवे के किनारे बसे इस कस्बे में कई जगहों पर तबाही के अवशेष अब भी दिखाई देते हैं। उजड़े मकानों, क्षतिग्रस्त व्यापारिक प्रतिष्ठानों और मलबे के ढेर आपदा की भयावहता की कहानी बयां करते हैं।
हालांकि, समय के साथ धराली में हालात धीरे-धीरे बदलने लगे हैं। मलबे के बीच से रास्ते निकाले गए हैं और स्थानीय लोग एक बार फिर अपने जीवन को सामान्य बनाने की कोशिश में जुटे हैं। उजड़े हुए बागों में फिर से हरियाली लौटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। लोग अपनी मेहनत और हिम्मत के दम पर जिंदगी को दोबारा रफ्तार देने में लगे हैं।

स्थानीय लोगों की जीवटता और संघर्ष के साथ ही प्रशासन और सरकार की ओर से पुनर्निर्माण कार्य भी किए जा रहे हैं। सड़क, सुरक्षा और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रयास जारी हैं, ताकि धराली फिर से अपने पुराने स्वरूप की ओर लौट सके।
हालांकि, आपदा से पहले जैसा धराली पूरी तरह दोबारा खड़ा हो पाएगा या नहीं, यह अभी भविष्य के गर्भ में है। लेकिन स्थानीय लोगों का हौसला और बेहतर भविष्य की उम्मीद आज भी कायम है। धराली अब सिर्फ तबाही की कहानी नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस और नई शुरुआत की मिसाल बनने की कोशिश कर रहा है।
